राम रस पीले रै पिलावें मेरा गुरु ज्ञानी।

पिलावें मेरा गुरु ज्ञानी-2  ।

राम रस…।

आया था तु हरि भजन नै  ।

भूल गया नादान बतावें मेरे गुरु ज्ञानी।

राम रस…।

मोह माया में फसकर बन्दे। 

मकड़ी जैसा जाल बतावे मेरे गुरु ज्ञानी।

राम रस …।

जिस घर में हो गुरुओं की सेवा।

 वो घर स्वर्ग समान बतावे मेरे गुरु ज्ञानी।

राम रस …।

जिस घर में हो भगवत गीता।

 वहाँ रहवै श्री भगवान बताबे मेरे गुरु ज्ञानी।

राम रस …।

जिस घर में हो तुलसी का बिड़ला।

 वहाँ गंगा स्नान बताबे मेरे गुरु ज्ञानी।

राम रस…।

जिस घर मे हो बेटा सुपात्र।

 वो श्रवण जैसा लाल बतावे मेरा गुरु ज्ञानी।

राम रस…।

जिस घर मे हो बहु हे सुपात्र।

वहाँ लक्ष्मी का वास बतावे मेरा गुरु ज्ञानी।

राम रस…।

जिस घर मे देवा सास ससुर है।

वहाँ है चारो धाम बतावे मेरा गुरु ज्ञानी।

राम रस…।

जिस घर मे हो भजन किर्तन।

बरसै मेहर दिन रात बतावै मेरा गुरु ज्ञानी।

राम रस…।

Categories: Guru Bhajan

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