गुरु जी के ज्ञान बिना मुक्ति कैसे पाओगे।

तेली के घर बैल बनोगे कोल्हू के मै चालोगे।

दिन रात फिरने से चलने ना पाओगे।

गुरु जी…।

अगले जन्म मे ऊट बनोगे नाका मै नकेल घलाओगे।

दूर दूर की कोस करके जंगल मे चरने जाओगे।

गुरु जी…।

कुमारा के घर बनो गधेड़ा कड़ पै बोझ लदाओगे।

दिन रात बोझ ढोह के रुड़ी मे चरने जाओगे।

गुरु जी…।

बम्बई के मै सर्प बनोगे जंगल मै धक्का खाओगे।

जो देखै वो मारन भागै कब तक जान बचाओगे।

गुरु जी…।

बाजीगर कै बनो बन्दरिया घर घर खेल दिखाओगे।

कहत कबीर सुनो भई साधो मांग मांग के खाओगे।

गुरु जी…।

Categories: Guru Bhajan

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