पर्वत की ऊची चढाई रे भोले तेरे दर्शन को आई रे।

मै तो जल भर कलश ले आई रे ।

झाड़ो मे उलझती आई रे ।

सापं बिच्छू ने बहुत डराई रे मेरी गगरी

छलकती आई रे।

पर्वत की ऊची💐💐💐💐💐💐💐💐।

मै तो चंदन केसर लाई रे।

श्मशानो को देख घबराई रे ।

भूत प्रेतों ने ऐसी डराई रे मेरी केसर

बिखरती आई रे।

पर्वत की ऊची💐💐💐💐💐💐💐💐।

मै तो भंगिया घोट के लाई रे।

द्वारे नन्दी को बैठे पाई रे ।

नन्दी ने मोहे समझाया रे भोले ने 

समाधी लगाई रे।

पर्वत की ऊची💐💐💐💐💐💐💐💐।

मै तो हार बना के लाई रे।

शिवजी के गले पहनाई रे।

भोले ने पलके उठाई रे शिव गौरा

के दर्शन पाई रे।

पर्वत की ऊची💐💐💐💐💐💐💐💐।


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