घना दिना मै फौजी छुट्टी आया।फुली नहीं समाई हे सखी करने ना पाई दो बात हे सखी।लया बिस्तर अंगना मे टेका।ऊपर तै बोला काला काग हे सखी करने ना …
कंकड़ मार काला काग भगाया।तो इतने मै जाग गया सुसर सखी करने ना …।
हुक्का पानी दे मैनै सुसर सुवाया।तो इतने मै जाग गई सासं हे सखी करने ना…।
हाथ पैर दाब मैनै सासं सुवाई।तो इतने मै जाग गया जेठ हे सखी करने ना…।
रोटी पानी दे के मैनै जेठ खंदाया।तो इतने मै जाग गया देवर सखी करने ना…।
बैट बोल दे के मैनै देवर सुवाया।तो इतने मै जाग गई ननद सखी करने ना…।
गुडिया दे के मैनै ननद सुवाई।तो इतने मै रुठ गया बलम सखी करने ना…।
पप्पी सप्पी दे के मैनै राजा हे मनाया।तो इतने टुट गई खाट हे सखी करने ना…।
शेरु बाई जोड़ मैनै खाट सुधारी ।तो इतने निकलाया दिन हे सखी करने ना…।
दिन निकला जब पीली पाटी ।तो इतने मै आ गई गाडी हे सखी करने ना…।
ठा बिस्तर गाड़ी मै बैठ लिया।बड़ कोने मै रोई हे सखी करने ना पाई…।
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