
गुरु बिना कौन उतारे पार।
बिना गुरु के जो भी उतरे।
डूब गया मझधार-2।
गुरु बिना…।
मानुष जीवन का ये चोला।
इस कारण ये अनमोला।
बिना गुरु के संगत समझो।
ये जीवन बेकार गुरु बिना कौन उतारे पार।
बिना गुरु के…।गुरु बिना…।
धर्म कर्म कि भाषा क्या है।
मुक्ति कि परिभाषा क्या है।
बिना गुरु के समझ ना आवे।
जगत का ये व्यवहार गुरु बिना कौन उतारे पार।
बिना गुरु के…।गुरु बिना…।
गुरु ज्ञान तो है इक सागर।
शांत भई जग मन कि गागर।
रोम रोम मे गुरु रुप मे।
पायो कृष्ण मुरार गुरु बिना कौन उतारे पार।
बिना गुरु के…।गुरु बिना…।
स्वयं ब्रह्म है गुरु हमारे।
फिर क्यु जाते द्वारे द्वारे।
कुछ भी बाहर नहीं है इनसे।
निराकार साकार गुरु बिना कौन उतारे पार।
बिना गुरु के…।गुरु बिना…।
मन मुख हर एक पग पर अटके।
गुरु मुख दास कभी ना भटके।
गुरु कृपा से ही सम्भव है।
मन के मिटे विकार गुरु बिना कौन उतारे पार।
बिना गुरु के…।गुरु बिना…।
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