
गुरु बिना कौन उतारे पार।
बिना गुरु के जो भी उतरे।
डूब गया मझधार-2।
गुरु बिना💐💐💐💐💐💐।
मानुष जीवन का ये चोला।
इस कारण ये अनमोला।
बिना गुरु के संगत समझो।
ये जीवन बेकार गुरु बिना कौन उतारे पार।
बिना गुरु के💐💐।गुरु बिना💐💐💐।
धर्म कर्म कि भाषा क्या है।
मुक्ति कि परिभाषा क्या है।
बिना गुरु के समझ ना आवे।
जगत का ये व्यवहार गुरु बिना कौन उतारे पार।
बिना गुरु के💐💐।गुरु बिना💐💐💐।
गुरु ज्ञान तो है इक सागर।
शांत भई जग मन कि गागर।
रोम रोम मे गुरु रुप मे।
पायो कृष्ण मुरार गुरु बिना कौन उतारे पार।
बिना गुरु के💐💐।गुरु बिना💐💐💐।
स्वयं ब्रह्म है गुरु हमारे।
फिर क्यु जाते द्वारे द्वारे।
कुछ भी बाहर नहीं है इनसे।
निराकार साकार गुरु बिना कौन उतारे पार।
बिना गुरु के💐💐।गुरु बिना💐💐💐।
मन मुख हर एक पग पर अटके।
गुरु मुख दास कभी ना भटके।
गुरु कृपा से ही सम्भव है।
मन के मिटे विकार गुरु बिना कौन उतारे पार।
बिना गुरु के💐💐।गुरु बिना💐💐💐।
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