
कब तक करु हे बडाई हनुमान की।
बढाई हनुमान की माँ अंजनी के लाल की।
कब तक करु💐💐💐💐💐💐।
राम नाम धर दिल के अन्दर।
पल भर मै गए कुद समुद्र।
रामजी की सेवा के मै बाजी ला दी जान की।
कब तक करु💐💐💐💐💐💐।
फल खाए और बाग उजाड़े।
दशकन्धर के नक्शे झाड़े।
डाली तोड़ बगाई हे वो रावण के बाग की।
कब तक करु💐💐💐💐💐💐।
बाग के माली बरजन लागे।
शेर की ढाला गर्जन लागया।
साहमी कोन्या आया कोई उस बलवान कै
कब तक करु💐💐💐💐।
कुद समुद्र लंका मै आया।
उन बागा मै कुदा हे जहाँ बैठी सिया जानकी।
कब तक करु💐💐💐💐💐।
लाए अंगुठी गोदी मै गेरी।
या हे अंगुठी मेरा हे पति की।
रामचन्द्र कित बन मै खो आए।
कोए जानवर ठाके लाया।
हीया उझल आया हे या रोवै सिया जानकी।
कब तक करु💐💐💐💐💐💐।
पहाड़ उठाए हथेली पै लाया।
सुषेण वैद लंका तै लाया।
लक्ष्मण के प्राण बचाए हे संजीवन बुटी लाय के।
कब तक करु💐💐💐💐💐💐।
आजांगे श्री रामचंद्र ले जा सतनारी।
हाथा के मै भाला ले रही राक्षसनी धमका रही।
ताना ऊपर ताना मारै बैठ गई जानकी।
कब तक करु💐💐💐💐💐💐।
सब दिन करु हे बढाई हनुमान की।
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