
जय भोले भंडारी ओ बाबा जय भोले।
क्या रे तपस्या गंगा जी ने की थी ।अपनी जटा मे जगह तुमने दे दी।
जय भोले…।
क्या रे तपस्या चन्द्रमा की थी।अपने मस्तक पे जगह तुमने दे दी।
जय भोले…।
क्या रे तपस्या सर्पों ने की थी।अपने गले मे जगह तुमने दे दी।
जय भोले…।
क्या रे तपस्या त्रिशूल ने की थी।क्या रे तपस्या डमरू ने किनी।अपने हाथ मे जगह तुमने दे दी।
जय भोले…।
क्या रे तपस्या नादिया की थी ।अपनी पीठ पे जगह तुमको दे दी।
जय भोले…।
क्या रे तपस्या गौरा जी ने की थी।अपने बाएँ अंग जगह तुमने दे दी।जय भोले…।
क्या रे तपस्या गणपत ने की थी ।अपनी गोद मे जगह तुमने दे दी।
जय भोले…।
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