Geet
हे दिल्ली के मै हलवाई की मोधी पड़ी कढाई
हे दिल्ली के मै हलवाई की मोधी पड़ी कढाई हे पाचं बराती बयाहवन चढ गया खड़ा लखावै भाई। हे काका भी छोडा ताऊ भी छोडा छोडा सगा जमाई हे भातइया नै न्यु लेगा हे म्हारी बनी रहै असनाई। हे अपने पिता कै मार मुंडासा मै सोलह साल कमाई हे चलती Read more…


