बनवादे रे भोले सोने की एक अटरिया।

तुम तो भोले 80 बरस के।

मेरी है बाली उमरिया बनवादे रे भोले 

सोने की एक अटरिया।

बनवादे रे भोले…।

शिवशंकर ने हुकम किया जब विश्वकर्मा

बुलवाए।

सोने का तो महल बनाया सोने के खम्भ लगाए।

ऐसी सुन्दर बनी अटरिया ठहरे नहीं नजरिया।

बनवादे रे भोले…।

महल बना जब सोने का तो हवन यज्ञ करवाया।

रावण जैसा ज्ञानी पंडित पूजन को बुलवाया।

पूजा करते करते पड़ गई रावण की नजरिया।

बनवादे रे भोले…।

रावण बोला ओ मेरे स्वामीमै हूँ दास तुम्हारा।

सोने का ये महल आपका लगे बडा ही प्यारा।

मुझको दान मे देदो भोले सोने की ये अटरिया।

बनवादे रे भोले…।

महल अटारी दान मे देकर शिव कैलाश पधारे।

रुठ के बैठी गौरा मैया शिवजी लगे मनाने।

अपने भाग मे नहीं है गौरा सोने की अटरिया।

बनवादे रे भोले…।

शिवशंकर हनुमान बने सीता का पता लगाया।

पूछ मे बैठी गौरा मैया लंका नगर जलाया।

खाख मे मिल गई रावण तेरी सोने की अटरिया।

बनवादे रे भोले…।

Categories: Shiv bhajan

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