ग्यारस की हे मै कथा सुनाऊ।

अहे थम सुनियो ध्यान लगाए

ग्यारस तो बडे नेम की।

एक बुढिया कै दो बेटे थे।

अहे दोनवा की बहुड़ साथ मै

 कथा सुनाऊ ग्यारस की ।

बडली बहु पै रोटी मांगी।

अहे वा रोटियां नै गई नाट मै

 कथा सुनाऊ ग्यारस की ।

के सासड़ तु खेत कमावै।

अहे के राखै घर का ध्यान मै

 कथा सुनाऊ ग्यारस की ।

ना बहुड़ मै खेत कमाऊ।

अहे ना राखु घर का ध्यान

मै सतसंग के मै जाऊ।

भूखी प्यासी पड़ी हे खाट मै।

अहे वा सो गई चादर तान मै

 कथा सुनाऊ ग्यारस की ।

ग्यारस का वो दिन था बेबे।

अहे सपने मै आए भगवान मै

 कथा सुनाऊ ग्यारस की ।

छोटी बहु नै बेरा पाटया।

अहे सासड़ मेरे संग मै चाल मै

 कथा सुनाऊ ग्यारस की ।

ताता पानी तैयार धरा सै।

अहे उसने करी रसोई तैयार 

मै कथा सुनाऊ ग्यारस की ।

जिम झुठ के चलु कराई।

अहे झोपड़ी के बन गए महल

मै कथा सुनाऊ ग्यारस की ।

बहुड़ तो ऐ वा खेत कमावै।

अहे बुढी राखे घर का ध्यान

मै कथा सुनाऊ ग्यारस की ।

अहे उसके सब कहाके ठाठ

मै कथा सुनाऊ ग्यारस की ।

बडली बहु वा पुछन लागी।

अहे बेबे धन कड़े तै लयाई

मै कथा सुनाऊ ग्यारस की ।

बडली बहु नै बेरा पाटया।

अहे सासड़ उल्टी घरनै चाल

मै कथा सुनाऊ ग्यारस की ।

ताता पानी तैयार धरा सै।

अहे सासड़ नाहना हो तो नाहए

मै कथा सुनाऊ ग्यारस की ।

तपी रसोई ठंडी हो सै।

अहे सासड़ जीमना हो तो जीम

मै कथा सुनाऊ ग्यारस की ।

जीम झुठ के चलु कराई।

अहे उसके घर के बारह बाट

मै कथा सुनाऊ ग्यारस की ।

बुढी नहीं वा सत की ग्यारस।

अहे थम सुन लो ध्यान लगाए

मै कथा सुनाऊ ग्यारस की ।

ग्यारस तो हे वा न्युठ बोली।

अहे थम राखो बडा का मान

मै कथा सुनाऊ ग्यारस की ।

जैसी करनी वैसी भरनी।

अहे करनी का मिल जा फल

मै कथा सुनाऊ ग्यारस की ।


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