मीठी तो करदे री माता कोथली।

हेरी जांगे बाहन के देश पपीहा बोलया बाग मै।

याले रै याले बेटा कोथली।

बेटा जाइये बाहन कै रै देश पपीहा बोलया बाग मै।

याले तु याले री मौसी कोथली।

मौसी कित रै गई सै म्हारी बाहन

पपीहा बोलया बाग मै।

गोबर गेरन बेटा वा गई।

अरे दौर जिठानी उसके साथ

पपीहा बोलया बाग मै।

कुरड़ी तो कुरड़ी हे मौसी मै फिरा।

हे री किते ना पाई म्हारी बाहन

पपीहा बोलया बाग मै।

सरवर पानी रै बेटा वा गई।

अरे छोटी तो नन्दल उसके साथ

पपीहा बोलया बाग मै।

कुआं तो कुआं हे मौसी मै फिरा।

हे री किते ना पाई म्हारी बाहन

पपीहा बोलया बाग मै।

ईख नलावन बेटा वा गई।

अरे छोटा तो देवर उसके साथ

पपीहा बोलया बाग मै।

डोला तो डोला हे मौसी मै फिरा।

हे री किते ना पाई म्हारी बाहन

पपीहा बोलया बाग मै।

ऊपर चढके रै बेटा देख ले।

अरे वा रै जल सै तेरी बाहन

पपीहा बोलया बाग मै।

उल्टी तो दे दे मौसी कोथली।

हेरी मरी ऐ पड़ी सै म्हारी बाहन

पपीहा बोलया बाग मै।

Categories: sawan geet

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