
भजन के बारे में
गुरु भजन — भक्त सतगुरु से पूछती है कि चिंता नाम की बुरी बला कैसे जाएगी: ब्याह, गौना, बच्चों का जन्म-ब्याह और गंगा-जमना स्नान सब कर लिया, फिर भी चिंता नहीं गई। भजन का भाव है कि मन की शांति गुरु की शरण से ही मिलती है।
कब गाया जाता है: गुरु पूर्णिमा और सत्संग में।
मुखड़ा (Hinglish): Satguru chinta buri balaaye, bata do jaagi kyaahe tai.
भजन के बोल
सतगुरु चिंता बुरी बलाए बतादो जागी कयाहे तै।
बतादो जागी कयाहे तै बतादो जागी कयाहे तै।
सतगुरु चिंता बुरी…।
ब्याह करवाया मैनै गोणा करवाया।
गई ना घुंघट काढे तै-2
सतगुरु चिंता बुरी…।बतादो जागी…।
सतगुरु चिंता बुरी…।
बेटा भी जाया मैनै बेटी भी जाई।
गई ना गोद खिलाने तै-2
सतगुरु चिंता बुरी…।बतादो जागी…।
सतगुरु चिंता बुरी…।
बेटा भी ब्याहा मैनै बेटी भी ब्याही।
गई ना दान कराने तै-2
सतगुरु चिंता बुरी…।बतादो जागी…।
सतगुरु चिंता बुरी…।
गंगा भी नहाई मै तो जमना भी नहाई।
गई ना गोते लाने तै-2
सतगुरु चिंता बुरी…।बतादो जागी…।
सतगुरु चिंता बुरी…।
चुग चुग लकड़ी चिता बनाई।
चली गई आग लगाने तै-2
सतगुरु चिंता बुरी…।बतादो जागी…।
सतगुरु चिंता बुरी…।
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