गुरु शरण मै आओ थम सतसंगी बन जाओ।

सतसंग तीर्थ सबसे चंगा।

यही है जमना यही है गंगा।

गोता रोज लगाओ थम सतसंगी बन जाओ।

गुरु शरण…।

सतगुरु मिले तारने वाले।

काम क्रोध को मारने वाले।

नित उठ दर्शन पाओ थम सतसंगी बन जाओ।

गुरु शरण…।

बडे भाग से नर तन पाया।

जन्म मरण मै फेर नहीं आवै।

किर्तन करो कराओ थम सतसंगी बन जाओ।

गुरु शरण…।

समय अमोलक बीता जाता।

गया बखत मुड़कर नहीं आता।

घर घर प्रेम फैलाओ थम सतसंगी बन जाओ।

गुरु शरण…।

गुरु श्री गोरखनाथ हमारे।

सच्चा ज्ञान बताने वाले।

उनके चरणों मे शीश झुकाओ थम सतसंगी बन जाओ।

गुरु शरण…।

Categories: Guru Bhajan

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