
भजन के बारे में
गुरु भजन — ‘जाग सखी, तेरे सतगुरु आए’। भजन समझाता है कि केवल व्रत और गंगा स्नान से मन का दाग नहीं धुलता; जीवन दो दिन का मेला है, इसलिए गुरु की शरण में जाकर भीतर से जागना ज़रूरी है।
कब गाया जाता है: गुरु पूर्णिमा, सत्संग और सुबह की प्रभात फेरी में।
मुखड़ा (Hinglish): Jaag sakhi uth jaag he, tere Satguru aaye.
भजन के बोल
जाग सखी उठ जाग हे तेरे सतगुरु आए।
सतगुरु आए तेरे साहिब आए।
जाग सखी…।
बरत करे तैनै पुरनवासी।
क्यातै मरी हे तु तो भुखी हे प्यासी।
अंदर ना लागा बैराग हे तेरे सतगुरु आए।
जाग सखी…।
गंगा जमना तु मलमल नहाई।
तनै चमड़ी की हे करी हे सफाई।
धोया ना दिल का दाग हे तेरे सतगुरु आए।
जाग सखी…।
दो दिन का हे तेरा दर्शन मेला।
उड जाएगा तेरा हंस अकेला।
उजड़ जागा तेरा बाग हे तेरे सतगुरु आए।
जाग सखी…।
शरण मै चन्द्र जति गोरख बोले।
संग गुरुवा कै तो आनंद हो गए।
(मिलके गुरु जी आनंद लेले।)
मिल जागा अटल सुहाग हे तेरे सतगुरु आए।
जाग सखी…।
0 Comments