पकड़ लो हाथ बनवारी नहीं तो डूब जाएंगे।

हमारा कुछ ना बिगड़ेगा तुम्हारी लाज जाएगी।

पड़ी मझधार मे नैया खिवैया कोई नहीं अपना।

खिवैया आप बन जाओ ।

तो बेड़ा पार हो जाए।

पकड़ लो…।

धरी है पाप कि गठरी हमारे सिर पर भारी।

वजन पापों का है भारी।

इसे कैसे उठाएंगे।

पकड़ लो…।

जो भेजा जहर का प्याला उसे भी पी गई मीरा।

दर्श दासी को दिखलाया।

वो दर्शन हम भी पाएंगे।

पकड़ लो…।

तुम्हारे हि भरोसे पर ये दुनिया छोड बैठे है।

जमाने कि तरफ देखो।

इसे कैसे निभाएंगे।

पकड़ लो…।

करु मै आस दर्शन कि सभी मोहजाल मिट जाए

ये मोहमाया के चक्र से ।

रहू मै दूर बनवारी।

पकड़ लो…।


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