ये तो अंगूठी मुझे प्राणों से प्यारी।

इसे कौन ले के आया इसे कौन ले के आया

 मेरे रघुवर की प्रीतम की।

माता भी छोड़ी मैंने पिता भी छोड़े ।

छोड़ दई ये जनकपुरी बाबुल की। 

ये तो अंगुठी…।इसे कौन…।

सासू भी छोड़ी मैंने ससुर भी छोडा।

 छोड दई ये अवधपुरी राजा दशरथ की। 

ये तो अंगुठी…।इसे कौन…।

देवर भी छोडे मेरे पति भी छोडे।

छोड दई ये पंचवटी रघुवर की ।

ये तो अंगुठी…।इसे कौन…।

पत्तों कि ओट मे हनुमत बोले।

इसे मै ले के आया-2

माता जानकी रघुवर की।

ये तो अंगुठी…।इसे कौन…।

Categories: Ram bhajan

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