
भजन के बारे में
शिव जी और भीलनी की लोककथा पर आधारित हरियाणवी भजन — कैलाश पर ध्यान में बैठे भोलेनाथ का ध्यान भीलनी की झांझर की रिमझिम झनकार से टूट जाता है, और फिर शिव जी व भीलनी के बीच मज़ेदार संवाद होता है।
कब गाया जाता है: सावन, महाशिवरात्रि और शिव कीर्तन में।
मुखड़ा (Hinglish): Ya rimjhim karti Bhilni kathinai chaali rai, Shankar baithe Kailash mai wathinai chaali rai.
भजन के बोल
या रिमझिम करती भिलनी कठिनै चाली रै।
शंकर बैठे कैलाश मै वठिनै चाली रै।
या रिमझिम…।
शंकर भोले जमा के गोले बैठे थे प्रभु ध्यान मे।रिमझिम-रिमझिम
झांझर की झनकार पड़ी जब कान मै।रुप देख रह गये दंग
सुध-बुध खो डाली रै।
या रिमझिम…।
बोले शंकर सुनो भिलनी बैठो पास हमारे जी।इस तन-मन कीबनो मालिक तुम बन गए दास तुम्हारे जी।तीन लोक की आज बना दूँ तुझको रानी रै।
या रिमझिम…।
बोली भिलनी सुनो सदाशिव भवँर भील म्हारा घर मै।तैनै मार के मैनै ले जावै हसीं होवगी घर-घर मै।थे बैठे प्रभु ध्यान लगावो दे-दे
ताली रै।या रिमझिम…।
ज्ञान ध्यान सब गया भूल भीलनी मत डरै तु मन मै।जटा बीच मै तैनै छुपालु मालूम पड़ोसी ही किसने।और बात मत डरै भीलनी करुंगा रुखाली रै।
या रिमझिम…।
घर मै थारै गवँर पार्वती जटा मै गंगा रहवे।अपनो हक वो छोड महादेव मैने क्यू रहने देवेगी।अही बात री होवे लड़ाई नहीं विचारी रै।या रिमझिम…।
पार्वती ने पीहर भेज दा सुनो भीलनी रानी जी।गंगा थारी करे चाकरी तु घर की धनयानी जी।और जो शंका होवे जो मन मै देवु मिटाई रै।या रिमझिम…।
बैल चढ़ू तो डरु महादेव सिंह देखै भय लागे।पैदल तो मै कदे ना चाली साची कहु थारे आगे जी।कहे सदाशिव डरो ना भीलनी बैठो पीठ हमारी जी।
या रिमझिम…।
महादेव का वचन यह सुन भीलनी ने माया हटाई।सामने ऊबी हसँ गौरजा शंकर गये सरमाई जी।मौची बन के मैनै छली थी बारी थारी आई जी।
या रिमझिम…।
हाथ जोड़कर कहे गौरजा हुयो हिसाब बराबर जी।राम मण्डली कहे फिर शंकर जम गये ध्यान लगाकर जी।सारी संगत हरदम गावे महिमा थारी जी ।
या रिमझिम…।
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