
तरेंगे वहीं जिनके मन मे हरी है।
मन मे हरी है जी मुख मे हरी है।
तरेंगे वही…।
गंगा मे नहाने से क्या पापी तर जाएंगे।
मछली क्यु ना तरी जिसका पानी मे ही घर है।
तरेंगे वही…।मन मे हरी…।
तरेंगे वही…।
फूल चढाने से क्या पापी तर जाएंगे।
भवराँ क्यु ना तरा जिसका फूलों मे ही घर है।
तरेंगे वही…।मन मे हरी…।
तरेंगे वही…।
चंदन लगाने से क्या पापी तर जाएंगे।
सापं क्यु ना तरा जिसका चंदन मे ही घर है।
तरेंगे वही…।मन मे हरी…।
तरेंगे वही…।
पूजा कराने से क्या पापी तर जाएंगे।
पंडित क्यु ना तरा जिसका मंदिर मे ही घर है।
तरेंगे वही…।मन मे हरी…।
तरेंगे वही…।
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