
तैनै कब कि श्याम बुलाए रही रै काजल
डलवाले आखया मै।
जमना को नीर मंगा दुंगी ।
तेरे हल्दी रै मटनो लगा दुंगी।
तैनै आपै हे मसल नुहा दुंगी रै काजल
डलवाले आखया मै।
तैनै कब कि…।
गोकुल मै बुलावो दे दुंगी।
सारी सखिया नै बुलवा लुंगी।
तेरो सतसंग मै करवा दुंगी रै काजल
डलवाले आखया मै।
तैनै कब कि…।
तेरो सोना को मुकुट मंगा दुंगी।
उमै मोर पंख लगवा दुंगी।
तेरे माथे बीच सजा दुंगी रै काजल
डलवाले आखया मै।
तैनै कब कि…।
तेरी बासं कि बासुरिया मंगा दुंगी।
उसनै(उनै) चांदी मै जड़वा दुंगी।
तेरे होठा बीच सजा दुंगी रै काजल
डलवाले आखया मै।
तैनै कब कि…।
तेरी गाय और बाछा लया दुंगी।
तैनै निखड़ु दूध पिला दुंगी।
माखन को भोग लगा दुंगी रै काजल
डलवाले आखया मै।
तैनै कब कि…।
तेरै राधा रै रुकमण ब्याह दुंगी।
तेरै सुथरी सी बहुड़ लया दुंगी।
तेरी जोड़ी अजब बना दुंगी रै काजल
डलवाले आखया मै।
तैनै कब कि…।
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