शिव शंकर भोलेनाथ हो नाथ तेरा डमरू बाजै पर्वत पै।

तोपे फुल चढे और पान चढे।तोपे चढे दूध कि धार हो

धार तेरा डमरु बाजै पर्वत पै।

शिव शंकर…।

तेरे आक धतूरे का भोग लगै।और चढे रोज कि भांग हो

भांग तेरा डमरु बाजै पर्वत पै।

शिव शंकर…।

तेरे अंग भभूति लाग रही।और लिपटे नाग हजार 

हजार तेरा डमरु बाजै पर्वत पै।

शिव शंकर…।

तेरे संग मे गौरा साज रही।गोदी मे गणपत लाल हो

लाल तेरा डमरु बाजै पर्वत पै।

शिव शंकर…।

तेरे द्वार पे तेरे भगत खड़े।तुम दो दर्शन एकबार 

एकबार तेरा डमरु बाजै पर्वत पै।

शिव शंकर…।

Categories: Shiv bhajan

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