
सारी मटकी का माखन बिखेर गयो रे l
यशोदा तेरा लाला किधर गयो रे।
घाटों में ढूंढ आई पनघट पे खोज़ आई l
गोपियों के बीच से निकल गयो रे l
यशोदा तेरा…।सारी मटकी…।
बागों में ढूंढ आई माली से पूछ आई l
कलियों के बीच से निकल गयो रे l
यशोदा तेरा…।सारी मटकी…।
सखियों से पूछ आई दाऊ से पूछ आई l
गलियों के बीच से निकल गयो रे l
यशोदा तेरा …।सारी मटकी…।
वृन्दावन में खोज़ आई घर घर में बोल आई l
ब्रज की लताओं में छुप गयो रे l
यशोदा तेरा …।सारी मटकी …।
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