
रोए रोए द्रोपद कान्हा जी से कह रही जी।
आज सभा मै आ जाइयो।
राखी को मोल चुका जाइयो।
आ जाइयो मेरे बीर रोए रोए द्रोपद💐💐💐💐।
नारी की रक्षा कौन करे या तो बीर करे
या पति करे ।
पाचों पांडव बैठे भैया हार के जी।
एक भरोसो तेरो है-2
दुनिया मै कोई ना मेरो है।
विपता ने मोहे घेरो है।
आ जाइयो मेरे रोए रोए द्रोपद💐💐💐💐।
आज सभा मै आ जाइयो।
राखी को मोल चुका जाइयो।
आ जाइयो मेरे बीर रोए रोए द्रोपद💐💐💐💐।
जब उंगली कटी तुम्हारी थी मैंने फाड़ी
रेशम साड़ी थी।
वचन दिया था तुमने अपनी बहन को जी।
मै समय पे तेरे आउंगा ।
राखी का मोल चुकाउंगा-2।
आ जाइयो मेरे बीर रोए रोए द्रोपद💐💐💐💐।
आज सभा मै आ जाइयो।
राखी को मोल चुका जाइयो।
आ जाइयो मेरे बीर रोए रोए द्रोपद💐💐💐💐।
ये दुष्ट मुझे सताते है मुझे नग्न
देखना चाहता है।
दुष्ट दुश्शासन भैया बैरी हो गया है।
केश पकड़कर भैया मेरे लायो है जी।
सब देवर जेठ हमारे है।
ये बैरी हुए हमारे है ।
बचाइयो मेरी लाज रोए रोए द्रोपद💐💐💐💐।
आज सभा मै आ जाइयो।
राखी को मोल चुका जाइयो।
आ जाइयो मेरे बीर रोए रोए द्रोपद💐💐💐💐।
रुकमण से बोले गिरधारी मेरी बात सुनो
रुकमण प्यारी।
राखी बंधाई मांगे बहना भाई से जी।
जो एकबार मुझे देता है ।
वो बार बार ले लेता है ।
यही है मेरी रीत रोए रोए द्रोपद💐💐💐💐।
आज सभा मै आ जाइयो।
राखी को मोल चुका जाइयो।
आ जाइयो मेरे बीर रोए रोए द्रोपद💐💐💐💐।
ये रक्षाबंधन पावन है ये भाई बहन का सम्बंध है।
राखी बंधाई भैया अपनी बहन से जी।
ये पावन राखी आती है ।
भैया की याद दिलाती है।
आ जाइयो मेरे बीर रोए रोए द्रोपद💐💐💐💐।
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