रघुपति राघव राजा राम पतित पावन सीता राम।  सीताराम-सीताराम भज प्यारे तु सीताराम।

रघुपति …।

भीड़ पड़ी भक्तों ने पुकारा कष्ट हरो प्रभु आप हमारा।तब दशरथ घर जन्मे राम पतित पावन सीताराम।

रघुपति …।

ताड़का वन मे ताड़का मारी गौतम नारी अहिल्या तारी।सब ऋषियों के पूर्ण काम पतित पावन सीताराम।

रघुपति…।

जाय जनकपुर शिव धनुष तोड़ा जनकसुता से नाता जोड़ा।

कैसी सुन्दर जोड़ी राम पतित पावन सीताराम।

रघुपति…।

सीता ब्याह राम घर आई घर-घर आनन्द मंगल छाए।

माता कौशल्या को करें प्रणाम पतित पावन सीताराम।

रघुपति…।

राजतिलक की भई तैयारी केकैई माँ ने बात बिगाड़ी।

चौदह वर्ष गये वन मे राम पतित पावन सीताराम।

रघुपति…।

पंचवटी मे कुटिया बनाई सुरपनखा की नाक कटाई।

खरदुषण का किया संहार पतित पावन सीताराम।

रघुपति…।

जब से हरण हुआ सीता का मन मे ध्यान किया शंकर का।

तब से प्रकट हुए हनुमान मुख से निकला जम सिया राम।

रघुपति…।

लंका जाकर रावण मारा धरती माँ का भार उतारा।

सब देवो मे जय -जयकार पतित पावन सीताराम।

रघुपति…।

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Categories: Ram bhajan

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