
मुश्किल है सहन करना हाय दर्द जुदाई का।
मुझे अब तो बता श्यामा कारण रुसवाई का।
मुश्किल है सहन…।
तेरे झुठे वादों पर इतबार किया मैंने।
तेरी कृपा को सुनकर के ये प्यार किया मैंने।
क्या यही सीला मिलता है ये प्रीत लगाने का।
मुश्किल है…।
मेरी नजर मे अवगुण थे तो क्यों अपनाया था।
ये प्रीत ना नीभ सकती पहले ना बताया था।
मौका तो दिया होता मेरी प्रीत लगाई का।
मुझे अब तो…।मुश्किल है…।
तुमसा ना कोई मिल जाता तो ढूंढ लिए होते।
क्यों प्यार तुम्हें करते क्यों तेरे लिए रोते।
मुख मोड़ के बैठे हो क्या मान खुदाई का।
मुझे अब तो…।मुश्किल है…।
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