
मेरी झोली छोटी पड़ गई रे इतना दिया मेरे बाबा।
मै निर्धन बहुत घना था ।एक पैसा पास नहीं था।
गढी पे गढी लग गई रे इतना दिया मेरे बाबा ।
मेरी झोली …।
मै टुटी झोपड़ियाँ मे रहता ।रहने को मकान नहीं था।कोठी पे कोठी बन गई रे इतना दिया मेरे बाबा।
मेरी झोली…।
मेरे टोटा बहुत घना था। मै बना सेठ घना मोटा ।
गाडी पे गाडी चल गई रे इतना दिया मेरे बाबा।
मेरी झोली…।
मै खेती बहुत करें था ।खाने को अनाज नहीं था।
बोरी पे बोरी लग गई रे इतना दिया मेरे बाबा।
मेरी झोली …।
मै मेहंदीपुर मे आया ।मेरी कंचन हो गई काया।
हृदय मे ज्योत जगा दई रे इतना दिया मेरे बाबा।
मेरी झोली…।
0 Comments