
भजन के बारे में
यह हास्य-भरा हरियाणवी शिव भजन है। एक जाट किसान भोलेनाथ से शिकायत करता है कि उसकी जाटनी शिव भक्ति में ऐसी रम गई है कि घर का काम, बूढ़े माँ-बाप और छोटे बच्चे सब भूल गई — रोज़ भोले को दूध से नहलाती है और छप्पन भोग लगाती है।
कब गाया जाता है: सावन के सोमवार, महाशिवरात्रि और महिलाओं के कीर्तन में।
मुखड़ा (Hinglish): Meri Jaatni pagal ho gayi Bhole tere pyaar mai, bas len de mera dhund yaar tu ke lega takraar mai.
भजन के बोल
मेरी जाटनी पागल हो गई भोले तेरे प्यार मै।
बस लेन दे मेरा ढुंढ यार तु के लेगा तकरार मै।
मै मांगु सु दही का प्याला मैनै आंख दिखावै सै।
भर के लोटा दूध का वा तैनै रोज नहलावै सै।
तेरे प्यार मै पागल हो गई भूल गई भरतार नै
बस लेन दे मेरा ढुंढ यार तु के लेगा तकरार मै।
मेरी जाटनी…।
बखत उठ के हलसी जोड़ु यो सै घर का काम मेरा।
रोटी तक ना पहुचावै मै देखु बाट खड़ा-खड़ा।
तेरे छप्पन भोग लगावै हाली जाओ चाहे भाड़ मै
बस लेन दे मेरा ढुंढ यार तु के लेगा तकरार मै।
मेरी जाटनी…।
बुढे सै मेरे माई रै बाबु सेवा का कोए काम नहीं।
दो बालक मेरे छोटे-छोटे उनका भी कोए ध्यान नहीं।
नहा धोए के मन्दिर मै जावै लगी रहवै श्रृंगार मै
बस लेन दे मेरा ढुंढ यार तु के लेगा तकरार मै।
मेरी जाटनी…।
तेरी गलया जाने कि यैनै पक्की तैयारी कर राखी।
मेरा ढुंढ बसावै कोन्या या मेरै पक्की जच राखी।
हाथ जोड़ के कह रहा हो बाबा बस लेन दे परिवार नै।
बस लेन दे मेरा ढुंढ यार तु के लेगा तकरार मै
0 Comments