
मेरे मन बस गई हे इस बाबा कि तस्वीर।
राम-राम,राम-राम सियाराम राम-राम।मेरे मन…।
जय बजंरग कि ए बोलन लागे।प्रेम नशे मै टुलण लागे।
उड़े हो रही जय-जयकार मेरे मन…।
सुबह सवेरे तेरी करे आरती।भक्तों कि ना टुटे लार सी।
भर रहा स दरबार मेरे मन…।
जब लागी बालाजी को अर्जी।बिल्कुल काम नहीं स फर्जी।
कर दिया बेड़ा पार मेरे मन…।
सोऊ सुए ना आखँ लागती।दिल कि चिन्ता ना दुर भागती।
ना भावै हलवा खीर मेरे मन …।
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