
मेरे घर के आगे श्याम तेरा मन्दिर बन जाए।
जब खिड़की खोलु तो तेरा दर्शन हो जाए।
जब आरती हो मन्दिर मे घण्टा तो सुनाई देगा।
जब भजन करेगा कोई हमको भी सुनाई देगा।
तेरे भजन के सुनने से मेरा भाव बदल जाए।
मेरे घर…।जब खिडक़ी…।
मै रोज सवेरे शाम तुझको प्रणाम करु।
जो मेरे लायक होगा वो तेरा काम करु।
तेरी सेवा करने से मेरा भाग्य बदल जाए।
मेरे घर…।जब खिडक़ी…।
मै कलियां चुन चुन श्याम तेरा हार बनाउंगी।
तुझे तिलक लगाके मोहन माला पहनाउंगी।
तेरी झाकी सजने से मन मन्दिर हो जाए।
मेरे घर…।जब खिडक़ी…।
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