कुदे यमुना मे कन्हैया ले के मुरली।

ले के मुरली कन्हैया ले के मुरली।

कुदे यमुना…।

कुद पड़े बनवारी जल मे ग्वाले ठाडे रोए।

कुछ तो ग्वाले घर को भागे यशोदा जाए पुकारे।

जल मे कुद गयो कन्हैया ले के मुरली।

कुदे यमुना…।

रोवत-रोवत यशोदा मैया यमुना तट पर आई।

मोहे छोड के कहा चले हो मोहे कृष्ण कनहाई।

ठाडी रोवे तेरी मैया ले के मुरली।

कुदे यमुना…।

गेंद गई पाताल लोक मे वहाँ पे नागिन पाई।

सोया नाग जगा दे री नागिन बोले कृष्ण कनहाई।

गेंद दे-दे री नगनिया ले के मुरली।

कुदे यमुना…।

इतना सुनकर के नागिन ने नाग को दिया जगाए।

मारी फनकार बदन पे जाए लिपटे शीश पर आए।

काले पड़ गए रे कन्हैया ले के मुरली।

कुदे यमुना…।

माया-माया करके प्रभु ने अपना बदन पसारा।

चरण पकड़ के नागिन रोई छोड दो पति हमारा।

तब से हो गए नाथ नथिया ले के मुरली।

कुदे यमुना…।

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