
कृष्ण की गलियां राधा खेलनै गई थी
कृष्ण की माँ ने झोली देई हो राम।
सिर पुचकारा हे मेरे लाड लडाया
आसन झाड़ बिछाया हो राम।
पाच रुपये हे बेबे सेर मिठाई या
तेरी गोद भराई ओ राम।
हरी हरी चुड़ी हे राधा लाल या
साड़ी या तेरी मांग भराई ओ राम।
इतना सा लेके राधा घरनै आई राधा
की माता बुझनै लागी ओ राम।
साच बता दे हे मेरी राधा प्यारी
इतना कड़े त लेके आई ओ राम।
भिड़ी भिड़ी गलियां हे माता खेलनै गई
थी कृष्ण की माँ ने झोली दे दी ओ राम।
सिर पुचकारा मेरे लाड लडाये आसन
झाड़ बिछाया ओ राम।
सेर मिठाई हे माता हरी हरी चुड़ी
या मेरी गोद भराई ओ राम।
उन गलियां हे राधा फेर मत जाइये
उनै तेरी करी सै सगाई ओ राम।
उन गलियां हे माता फेर भी जांगी
उड़ै मेरा कृष्ण प्यारा ओ राम।
0 Comments