
कोरी मटकी मै दही जमै कोन्या राधा
बिना श्याम मिलै कोन्या।
बागों बागों मै फिर आई।
मेरा मन का फूल खिलै कोन्या राधा
बिना श्याम मिलै कोन्या।
कोरी मटकी…।
कुएँ कुएँ मै फिर आई।
या मन कि प्यास बुझै कोन्या राधा
बिना श्याम मिलै कोन्या।
कोरी मटकी…।
मन्दिर मन्दिर मै फिर आई।
या मन कि ज्योत जलै कोन्या राधा
बिना श्याम मिलै कोन्या।
कोरी मटकी…।
तालों तालों मै फिर आई।
या मन कि चाल डटै कोन्या राधा
बिना श्याम मिलै कोन्या।
कोरी मटकी…।
सतसंग किर्तन मै फिर आई।
या गुरु बिना ज्ञानमिलै कोन्या राधा
बिना श्याम मिलै कोन्या।
कोरी मटकी…।
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