भजन के बारे में

यह शादी के नेग में गाया जाने वाला पारंपरिक हरियाणवी लोकगीत है, जो सवाल-जवाब की शैली में है — अर्जुन किसके पुत्र (कुंती के), हनुमान किसके (अंजनी के), कहाँ से आए, कहाँ ठहरेंगे और कहाँ नहाएँगे।

कब गाया जाता है: शादी-ब्याह के नेग, बारात और मांगलिक अवसरों पर।

मुखड़ा (Hinglish): Kisne jaaye Arjun Paande, kisnai to jaaye Hanuman, Hanuman piyaare ye dal kit rai samaaye.

भजन के बोल

किसने जाये अर्जुन पांडे,किसनै तो जाये हनुमान,हनुमान पियारे ये दल कित रै समाये।

कुन्ती जाये अर्जुन पांडे,अन्जनी नै जाये हनुमान,हनुमान पियारे ये दल कित रै समाये।

कित तै आये अर्जुन पांडे,कित तै आये हनुमान,हनुमान पियारे ये दल कित रै समाये।

पूर्व सै आये अर्जुन पांडे,पश्चिम सै आये हनुमान,हनुमान पियारे ये दल कित रै समाये।

कित उतरैंगे अर्जुन पांडे,कित उतरैंगे हनुमान,हनुमान पियारे ये दल कित रै समाये।

बाग बगीचा अर्जुन पांडे,मन्दिर मै विराजे हनुमान,हनुमान पियारे ये दल कित रै समाये

कित नहावैंगे अर्जुन पांडे,कित नहावैंगे हनुमान,हनुमान पियारे ये दल कित रै समाये।

कुआँ बावड़ी अर्जुन पांडे,समुद्र मै कुदै हनुमान,हनुमान पियारे ये दल कित रै समाये।

के पहरैंगे अर्जुन पांडे,के पहरैंगे हनुमान,हनुमान पियारे ये दल कित रै समाये।

धोला वस्त्र अर्जुन पांडे,लाल लंगोटा हनुमान,हनुमान पियारे ये दल कित रै समाये।

के जीमैंगे अर्जुन पांडे,के जीमैंगे हनुमान,हनुमान पियारे ये दल कित रै समाये।

दाल भात तो अर्जुन पांडे,सरस मलिदो हनुमान,हनुमान पियारे ये दल कित रै समाये।

कित बैठेंगे अर्जुन पांडे,कित बैठेंगे हनुमान,हनुमान पियारे ये दल कित रै समाये।

चंदन चौकी अर्जुन पांडे,लाल पिलंग हनुमान,हनुमान पियारे ये दल कित रै समाये।

कद सुमरैंगे अर्जुन पांडे, कद सुमरैगे हनुमान,हनुमान पियारे ये दल कित रै समाये।

नीत उठ सुमरै अर्जुन पांडे,भीड़ पड़ी मै हनुमान,हनुमान पियारे ये दल कित रै समाये।

के देवैंगे अर्जुन पांडे,के देवैंगे हनुमान,हनुमान पियारे ये दल कित रै समाये।

अन्न धन देंगे अर्जुन पांडे,दूध र पुत्र हनुमान,हनुमान पियारे ये दल कित रै समाये।

लंका तोड़ बिलंका तोड़ी,लाए है सिया जी को जीत हनुमान

हनुमान पियारे ये दल कित रै समाये।

जैसे कारज राजा रामचन्द्र के सारे ऐसे म्हारे सुसरा(नाम)के सार हनुमान पियारे ये दल कित रै समाये।

ऐसे ही परिवार के सबके नाम लेकर सार हनुमान पियारे ये दल कित रै समाये।


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