
जब री ननद तेरै हो जागा भतीजा।
हेरी दे दुंगी गल का हसला।
हेरी सथिया की लीली बुंद ननद तैनै राजी कर दुंगी।
इब री भावज मेरै होजा सै भतीजा।
हेरी देदे ना गल का हसला।
हेरी सथिया की लीली बुंद भावज मैनै राजी कर दे नै।
इब री ननद तेरा भाई नाटै।
रै म्हारे कोन्या माँ जाई बाहन बीर क्यु घर नै लुटावै सै।
पहला तो री भाभी मारै थी बडाई।
देती बैरिया कर सै लड़ाई।
हेरी म्हारा घर सै दुकसीक दूर भावज
मै तो इब हि डिगर जांगी।
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