
भजन के बारे में
यह भोग और कीर्तन का भजन है जिसमें भक्तों को हरि नाम रूपी अमृत भर-भर कर पीने का आह्वान है। भजन में गणेश जी, भोलेनाथ, राम जी, माता रानी, श्रीकृष्ण और साईं — सभी के भवन में फूलों की वर्षा का सुंदर वर्णन है।
कब गाया जाता है: कीर्तन के अंत में भोग लगाते समय, सत्संग और जागरण में।
मुखड़ा (Hinglish): Hui varsha amrit ki, peelo bhagto bhar bhar ke. Tar jaoge Hari naam jap ke, doob jaoge abhimaan karke.
भजन के बोल
हुई वर्षा ,अमृत की।
पीलो भगतो, भर भर के।
तर जाओगे, हरी नाम जप के।
डूब जाओगे, अभिमान करके।
जो जीवे, सो पीवे।
जो पीवे, सो जीवे।
गणेश के भवन मे फूलो की वर्षा।
भोले के भवन मे फूलो की वर्षा।
राम के भवन मे फूलो की वर्षा।
माता के भवन मे फूलो की वर्षा।
कृष्ण के भवन मे फूलो की वर्षा।
साई के भवन मे फूलो की वर्षा।
वर्षा हो ऐ रही दरबार वर्षा हो ऐ रही।
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