
होली खेल रहे नंदलाल वृंदावन कुञ्ज गलिन में,
वृंदावन कुञ्ज गलिन में, गोकुल की कुंज गली में,
बरसाने कि राधा प्यारी, नंदगांव के छैल बिहारी,
हिल मिल खेलत गोपी ग्वाल, वृंदावन कुञ्ज गलिन में,
होली खेल रहे …।
याने भर पिचकारी मारी, मेरी साड़ी की आब उतारी।
मुखड़ा कर दिया लाल गुलाल वृन्दावन कुन्ज गली मे।
होली खेल रहे …।
मेरी सांस लड़ै गिरधारी मेरी नन्द लड़ै गिरधारी।
हो परणा आने ना दे वृन्दावन कुन्ज गली मे।
होली खेल…।
तेरी सासु भोली भाली तेरी नन्दल बालक छोरी।
हे तेरा पति बसे परदेस वृन्दावन कुंज गली मे।
होली खेल…।
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