
भजन के बारे में
बागड़ (राजस्थान-हरियाणा) का मज़ेदार भोग भजन — भक्त अपने खेत का मीठा मतीरा (तरबूज़) काटकर भगवान को भोग लगाती है; मतीरा देखकर लक्ष्मी जी भी चखने दौड़ी आती हैं और सारे देवताओं में प्रसाद बँटता है।
कब गाया जाता है: कीर्तन के अंत में भोग लगाते समय, खासकर गर्मियों में।
मुखड़ा (Hinglish): He upar tai Bhagwan utro darshan dene hai.
भजन के बोल
हे ऊपर तै भगवान उतरो दर्शन देने है।
धापा तोड़ लया मतीरो हर कै भोग लगवांगा।
ओ लयाऊ सु बाबु जी जरा चाकु लयाऊ सु।
मतीरो काट के थाली मे धर के दौड़ी आऊँ सु।
खाले हो भगवान मतीरो मीठो-मीठो सै।
यो तो ढुंढा भी ना पावै यो बागड़ को मतीरो सै।
हे देख के मतीरा नै या लक्ष्मी दौड़ी आई।
जरा हमने भी चखाईयो रामा के रै मिठाई सै।
हे भक्ता आला खेत को मतीरो आयो सै।
सारा देवता नै बाटं दे प्रसाद आयो सै।
सारा देवता ने प्रेम सै यो कण्ठ लगायो सै।
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