हे भिलनी तेरे आवैंगे भगवान रात नै सोइये मतना।

बखत उठ के कुटिया झाड़ी ।

सारे जंगल मे देई बुहारी।

हे भिलनी तु झाड़ बिछाले खाट-खाट ने ठाइये मतना।

हे भिलनी…।

बखत उठ  गंगा पै आई।

गंगाजल की झारी भर लाइये।

हे भिलनी तु पीले न दो घुट तीसरा पीइये मतना।

हे भिलनी…।

बखत उठ  बागो मे  जाइये।

पीले फूल तोड़ के लाईये।

हे भिलनी तु पौ ले ना दो हार तीसरा पोईये मतना।

हे भिलनी…।

बखत उठ के बन मै जाईये।

मीठे बेर तोड़ के लाईये।

हे भिलनी तु लाईये बेर बेर नै खाईये मतना।

हे भिलनी…।

खिड़की खोल के देखन लागी।

बेरा नै वो चाखन लागी।

हे भिलनी तेरे  खावैंगे भगवान बेर नै धोइये मतना।

हे भिलनी…।

राम और लक्ष्मण दोनों आए।

संग मै सीता जनक दुलारी।

हे भिलनी तैनै मांगना हो सो मांग आज सरमाइये मतना।

हे भिलनी…।

आपै हि जागी आपै हि सोई।

सारी जिंदगी बन मै खोई।

हे सखियों इब निकलेंगे मेरे प्राण आज थम रोईयो मतना।

हे भिलनी…।

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Categories: Ram bhajan

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