
दिल ने दिल भर के ना देखी मूर्ति सियराम की।
याद आती है कलेजे मे मेरे भगवान की।
प्रेम करो तो ऐसा करो जैसे करा मीराबाई ने।
बनके जोगन निकल पड़ी वो नाम लेकर श्याम का।
दिल ने दिल…।याद आती है…।
भगती करो तो ऐसी करो जैसी करी हनुमान ने।
फाड़कर सीना दिखाया मूर्ति सियराम की।
याद आती है…।दिल ने दिल…।
तुमसे तुमको मै मांगती हूँ देना हो तो दिजिए।
दुनिया भर की धन और दौलत है मेरे किस काम की।
याद आती है…।दिल ने दिल…।
फोड़कर आखें यु बोले बिलवा मंगल सुरदास।
जिसमें छवि हरी की नहीं वो आख है किस काम की।
दिल ने दिल…।याद आती है…।
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