
भजन के बारे में
प्रेम की वर्षा का भजन — पहली वर्षा पर्वत पर (गौरा मैया भीगीं), दूसरी सागर पर (लक्ष्मी मैया), तीसरी अयोध्या में (सीता मैया), चौथी मथुरा में (राधा रानी) और पाँचवीं सत्संग में, जहाँ सारी संगत भीग गई।
कब गाया जाता है: सत्संग और कीर्तन के अंत में, भोग लगाते समय।
मुखड़ा (Hinglish): Barsai mere Rama prem jal barsai.
भजन के बोल
बरसै मेरे रामा प्रेम जल बरसै।
पहली वर्षा हुई पर्वत पे।भीगे मेरे रामा या गौरा मैया भीगे।
बरसै मेरे…।
दुजी वर्षा हुई सागर पे।भीगे मेरे रामा या लक्ष्मी मैया भीगे।
बरसै मेरे…।
तीजी वर्षा हुई अयोध्या मे।भीगे मेरे रामा या सीता मैया भीगे।
बरसै मेरे…।
चौथी वर्षा हुई मथुरा मे।भीगे मेरे रामा या राधा रानी भीगे।
बरसै मेरे…।
पाचँवी वर्षा हुई सतसंग मे।भीगे मेरे रामा या सारी संगत भीगे।
बरसै मेरे…।
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