
भजन के बारे में
हरियाणवी बालाजी भजन — भक्त बालाजी से विनती करता है कि मुझे अपने दरबार में नौकर रख लो। रोज़ सवेरे झाड़ू लगाऊँगा, भक्तों के चरणों की धूल माथे पर लगाऊँगा और सेवादार बनकर तुम्हारे भवन में पड़ा रहूँगा।
कब गाया जाता है: मंगलवार-शनिवार, सालासर/मेहंदीपुर यात्रा और हनुमान जयंती पर।
मुखड़ा (Hinglish): Bala ji mainai naukar rakh le, man bha gaya darbaar tera.
भजन के बोल
बाला जी मैनै नौकर रख ले मन भा गया दरबार
तेरा तेरे भवन मै पड़ा रहुंगा बनके सेवादार तेरा।
रोज सवेरे झाडू लेके बाबा भवन भुवारुंगा।
तेरे भगतो कि धुल उडै मै मस्तक ऊपर ल्या लुंगा।
अपने सिर तै तारुंगा मै कर्जा पवन कुमार तेरा
तेरे भवन मै पड़ा रहुंगा बनके सेवादार तेरा।
बाला जी…।
ईष्ट देवता तु मेरे बाबा बसा हुआ मन मेरे मै।
इब तलक तो पता नहीं था भटका रोज अंधेरे मै।
मात पिता और कुटम्ब कबीला तु ही सै परिवार मेरा
तेरे भवन मै पड़ा रहुंगा बनके सेवादार तेरा।
बाला जी…।
निर्मल जल नाहवन कि खातिर ताजा पानी ल्यादुंगा।
दही मटना केसर कि गैलया ईत्र केवड़ा ल्यादुंगा।
अपने हाथा आप सजा दु बाला जी दरबार तेरा
तेरे भवन मै पड़ा रहुंगा बनके सेवादार तेरा।
बाला जी…।
सतपकवानी लाडु पेड़ा खीर चुरमा बना धरा।
छप्पन भोग धरी सतमेवा थाल पवनसुत भरा हुआ।
मेरे बस कि बात नहीं यो दुखी करै संसार तेरा
तेरे भवन मै पड़ा रहुंगा बनके सेवादार तेरा।
बाला जी…।
कृष्ण लाल ब्राह्मण नै तु जी सै प्यारा लागै सै।
तेरे दर्शन खातिर मन मेरा पंछी बन-बन भागै सै।
सिर पै हाथ गुरु का हो तो के करले संसार मेरा
तेरे भवन मै पड़ा रहुंगा बनके सेवादार तेरा।
बाला जी…।
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