
पल ही पल मे क्या हो जाए क्या खो
जाए क्या पा जाए सम्पत्ति और
शरीर का पता नहीं तकदीर का।
राजा दशरथ के चार पुत्र थे।
राम लखन सिया वन को गए थे।
चित्रकूट मे सबने देखा।
भेष बनाया फकीर का पता नहीं तकदीर का।
पल ही पल मे क्या 💐💐💐💐💐।
राजा हरिश्चंद्र थे बडे दानी।
काशी मे बिक गए तीनों प्राणी।
भंगी के घर सबने देखा।
घड़ा उठाया नीर का पता नहीं तकदीर का।
पल ही पल मे क्या 💐💐💐💐💐।
रानी द्रोपद दुष्टों ने घेरी।
लाए सभा मै करी ना देरी।
भरी सभा मे सबने देखा।
ढेर लगा दिया चीर का पता नहीं तकदीर का।
पल ही पल मे क्या 💐💐💐💐💐।
निर्धन को धनवान बना दे।
राजा को कंगाल बना दे।
कहना संत कबीर का पता नहीं तकदीर का।
पल ही पल मे क्या 💐💐💐💐💐।
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