
खड़ी खड़ी गौरा मनाए रही शिव को।
ऊँ ऊँ ऊँ कह के रिझाए रही शिव को।
सोने का लोटा गंगाजल पानी।
बूंद बूंद गौरा चढाए रही शिव को।
खड़ी खड़ी गौरा💐💐।ऊँ ऊँ ऊँ कह💐💐।
बागों मे जाके गौरा फूल तोड़ लाई।
गुथ गुथ माला चढाए रही शिव को।
खड़ी खड़ी गौरा💐💐।ऊँ ऊँ ऊँ कह💐💐।
बागों मे जाके गौरा बेलपत्र लाई।
राम नाम लिख के चढाए रही शिव को।
खड़ी खड़ी गौरा💐💐।ऊँ ऊँ ऊँ कह💐💐।
जंगल मे जाके गौरा भांग तोड़ लाई।
घोट घोट भंगिया पिलाए रही शिव को।
खड़ी खड़ी गौरा💐💐।ऊँ ऊँ ऊँ कह💐💐।
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