
गोविंद हरे गोपाल हरे मन भजो प्रभु
दीनदयाल हरे।
मैने चांदी का दान केदारनाथ मे किया।
मेरी ग्यारस के बराबर वो भी ना हुआ।
गोविंद हरे गोपाल…।
मैंने अन्न का दान बद्रीनाथ मे किया।
मेरी ग्यारस के बराबर वो भी ना हुआ।
गोविंद हरे गोपाल…।
मैंने गऊ का दान वृन्दावन मे किया।
मेरी ग्यारस के बराबर वो भी ना हुआ।
गोविंद हरे गोपाल…।
मैंने कन्या का दान जमाई राजा को किया।
मेरी ग्यारस के बराबर वो भी ना हुआ।
गोविंद हरे गोपाल…।
मैंने तुलसी का दान मन्दिर मे किया।
मेरी ग्यारस के बराबर वो भी ना हुआ।
गोविंद हरे गोपाल…।
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