
गोविंद चले आओ गोपाल चले आओ।
मेरे मुरलीधर माधव नन्दलाल चले आओ।
आखों मे बसे हो तुम धड़कन मे धड़कते हो।
कुछ ऐसा करो मोहन सासों मे समां जाओ।
गोविंद चले💐💐।मेरे मुरलीधर💐💐💐।
एक बार प्रभु आओ चाहे आकर चले जाना।
जाने नहीं देंगे हम जरा जाके तो दिखलाओ।
गोविंद चले💐💐।मेरे मुरलीधर💐💐💐।
तेरे दर्शन को मोहन ये नैन तरसते है।
एक पल भी चैन नहीं बिरहा मे बरसते है।
एक अर्ज लगी तुमसे अब और ना तरसाओ
गोविंद चले💐💐।मेरे मुरलीधर💐💐💐।
एक शर्त जमाने से इस दिल ने लगा ली है।
या मुझको बचा लो तुम या खुद ही चले आओ।
गोविंद चले💐💐।मेरे मुरलीधर💐💐💐।
वो कौन सी घड़ी होगी वो कौनसा पल होगा।
तेरे दर्शन कर मोहन मेरा जन्म सफल होगा।
गोविंद चले💐💐।मेरे मुरलीधर💐💐💐।
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