अरे तेरे रोज उलहाने आवै मन-मोहन मुरली वाले।

पहला उलहाना तेरा मालन के से आया ।

फुलड़ा तोड़ा तनै डाल झुकाई।

अरे तु तो पक्का चोर बताया मन मोहन मुरली वाले।

अरे तेरे…।

दुजा उलहाना तेरा धोबन के से आया।

कब्जा काढ़ा उसका दामन उठाया।

अरे तु तो चुनदड़ चोर बताया मन मोहन मुरली वाले।

अरे तेरे…।

तीजा उलहाना तेरा गुजरी के से आया।

मटकी फोड़ी उसका दही बखेरा।

अरे तु तो मक्खन चोर बताया मन मोहन मुरली वाले।

अरे तेरे…।

चौथा उलहाना तेरा राधा के से आया।

बंशी बजावे तु तो दिल को लुभावे।

अरे तु तो चित का चुरईया बताया मन मोहन मुरली वाले।

अरे तेरे…।


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