
भजन के बारे में
भोग के समय गाया जाने वाला भजन, जिसमें प्रभु से प्रार्थना है कि वे प्रसाद चखें तो वह अमृत हो जाए। भजन में कबीर दास जी के दोहे के भाव से विनती है — प्रभु इतना दीजिए जिसमें कुटुंब समाए, मैं भी भूखा न रहूँ और आपका दास भी भूखा न जाए।
कब गाया जाता है: कीर्तन के अंत में भोग लगाते समय।
मुखड़ा (Hinglish): Ye prasaad chaakho Prabhu, ye amrit ho jaaye. Amrit bhojan chaakh ke teri daasi amar ho jaaye.
भजन के बोल
ये प्रसाद चाखो प्रभु ये अमृत हो जाए।
अमृत भोजन चाख के तेरी दासी अमर हो जाए।
दाता के दरबार मे सभी खड़े हाथ जोड़।
देने वाला एक है मांगे लाख करोड़।
प्रभु इतना धन दिजिए जामे कुटुंब समाए।
मै भी भूखा ना रहु तेरा दास ना भूखा जाए।
आदि अंत भगवान को मेरी बार बार प्रणाम।
जिनकी कृपा दृष्टि से मेरा मन पावे विश्राम।
सियावर राम जय जय राममेरे प्रभु राम जय जय राम।
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