मैंने जब से गुरु का नाम लिया ।

अभिमान तो मैंने छोड दिया।

अभिमान था मुझको बेटे का।

मेरा बेटा कितना सुन्दर है।

एक दिन को प्रदेश को जाएगा।

मैंने यही समझ के छोड दिया।

मैंने जब…।अभिमान…।

अभिमान था मुझको बेटी का।

मेरी बेटी कितनी प्यारी है।

एक दिन ससुराल को जाएगी।

मैंने यही समझ के छोड दिया।

मैने जब…।अभिमान…।

अभिमान था मुझको काया का।

मेरी काया कितनी सुन्दर है।

एक दिन माटी मे मिल जाएगी।

मैंने यही समझ के छोड दिया।

मैंने जब…।अभिमान…।

अभिमान था मुझको दौलत का।

मुझे दौलत कितनी प्यारी है।

एक दिन या साथ ना जाएगी।

मैंने यही समझ कर छोड दिया।

मैंने जब…।अभिमान…।

अभिमान था मुझको महलों का।

मेरा महल कितना सुन्दर है।

एक दिन तो सबको जाना है।

मैंने यही समझ के छोड दिया।

मैंने जब…।अभिमान…।

Categories: Guru Bhajan

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