इतने सुरज उदय ना होय संजीवनी बुटी ले आइयो।

राम किसके तो थम घाले आए क्या रे तुम्हारा नाम।किसकै

लागा सै शक्ति रै बाण संजीवनी बुटी ले आइयो।

इतने सुरज…।

रामचन्द्र के घाले आए हनुमत म्हारो नाम।लक्ष्मण लागा सै शक्ति रै बाण संजीवनी बुटी ले आइयो।

इतने सुरज…।

हनुमत चढ गया पहाड़ पै चौगरदु चशै मसाल।हनुमत ल्याया सै पहाड़ उठाए संजीवनी बुटी ले आइयो।

इतने सुरज…।

बुटी प्यादी घोल कै जब हुया लक्ष्मण नै होश।जागो-जागो रै लक्ष्मण मेरा बीर बणा मै सोया बहोत घना।

इतने सुरज…।

राम घर तै चाल्या तीन प्राणी रहगा ऐकला राम।रोव-रोव हे राम भगवान बणा मै दुख बहोत घना।

इतने सुरज…।


0 Comments

Leave a Reply

Avatar placeholder

Your email address will not be published. Required fields are marked *