Ram bhajan
रै लागया तीर पड़ा धरती मै छुटि हाथ तै झारी
रै लागया तीर पड़ा धरती मै छुटि हाथ तै झारी रै के मिल गया तैनै तीर मार के कर दिया जुल्म शिकारी। रै इच्छा थी मेरे मात पिता कि तीर्थ कराने लाया था। प्यासे थे मेरे मात पिता मै पानी लेने खंदाया था। के तेरा मैनै माल चुरा लिया ले Read more…







